‘यादव परिवार’ में सबकुठ ठीक नहीं, अब शिवपाल को लेकर उठाया गया ये कदम

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साल 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले चली आ रही चाचा और भतीजे के बीच खींच’तान कम होने का नाम नहीं ले रही है. अब ये खींचतान निर्णायक दौर में पहुंच गई है. समाजवादी पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष के यहां याचिका दायर कर शिवपाल सिंह यादव की विधानसभा सदस्यता को रदद् करने की मांग की है.

विधानसभा में सपा के नेता और नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी की तरफ से याचिका दायर कर जसवंतनगर से सपा से विधायक शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ दलबदल का आरोप लगाते हुए विधानसभा सदस्यता को रद्द करने की मांग की है.

इस मामले में विधानसभा सचिवालय ने याचिका दायर होने की अधिसूचना जारी कर दी है. इसी के साथ यादव परिवार में सुलह-समझौते की सारी गुंजाईशों पर विराम लग गया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अखिलेश यादव ने साफ तौर संदेश दे दिया है कि वह किसी भी स्थिति में चाचा शिवपाल सिंह के साथ समझौता नहीं कर सकते हैं.

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साल 2016 में शुरु हुई तनातनी के बाद कई बार सुलह-समझौते की खबरें चली लेकिन ये अंतिम पडाव तक नहीं पहुंच पाई. इस बीच दोनों तरफ से खूब बयानबाजी होती रही, हद तो तब हो गई जब जसवंतनगर में अखिलेश और प्रो. रामगोपाल ने शिवपाल के खिलाफ वोट ड़ालने की बात कही. इतने विरोध के बावजूद शिवपाल सिंह यादव चुनाव जीत गए.

विधानसभा चुनाव के बाद थोड़े दिन तक तो शिवपाल सिंह चुप रहें लेकिन बाद में उन्होंने प्रसपा पार्टी का गठन कर ये संदेश दे दिया कि वह अब अकेले ही राह पर चल पड़े. उन्होंने प्रसपा से अपने भतीजे अक्षय के खिलाफ ही चुनाव लड़ा, वो तो नहीं जीत पाए लेकिन अक्षय को भी नहीं जीतने दिया.

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