83 साल के इतिहास में पहली बार बैंकिंग सेक्टर में प्रयोग हुई धारा 7, उर्जित पटेल दे सकते हैं इस्तीफ़ा

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सीबीआई के बाद सरकार का आरबीआई से टकराव बढ़ गया है, इसी टकराव के चलते बैंकिंग सेक्टर में तूफ़ान आने की प्रबल संभावना नजर आ रही है. केंद्र सरकार और आरबीआई के बीच अलग अलग मुद्दों में चल रहा टकराव अब सामने आ गया है.

एनपीए, नकदी संकट और बिजली कंपनियों को छूट, जैसे तीन मुद्दों पर सरकार ने आरबीआई से विचार करने के लिए कहा है. आरबीआई एक्ट की धारा 7 के तहत सरकार ने इन बिन्दुओं पर विचार करने के लिए कहा है, जिसके बाद से टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गयी है.

83 साल के इतिहास में किसी सरकार ने भी इस धारा का उपयोग नहीं किया था, पहली बार मोदी सरकार में इस धारा का प्रयोग इस सरकार ने किया है, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अगर सरकार ने इन बिन्दुओं पर आरबीआई को निर्देशित किया तो आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल इस्तीफ़ा दे सकते है.

इन तीन बिन्दुओ पर लगभग 1 महीने पहले सरकार ने आरबीआई को विचार करने के लिए कहा था, आरबीआई पहले ही इन बिन्दुओ पर नियम बदल चुकी है. बिजली कंपनियों को छूट देने की बात सरकार की तरफ से की जा रही है जबकि आरबीआई के नियम के तहत 12 फरवरी से बनाए गए नियम में पैसा लौटाने में असमर्थ बिजली विभाग पर 1 दिन की भी देरी पर वह  कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है, जिसमें सरकार ढील चाहती है.

दूसरा नियम आरबीआई ने कुल 12 बैंको को पीसीए की श्रेणी में रखा है, ये बैंक पहला कर्ज वापस किये बिना अपना नया कर्ज किसी को भी नहीं दे सकते है, जिसके लिए सरकार ने कहा है कि कम से कम छोटे और मंझोले उद्योग करने वालों को लोन उपलब्ध कराया जाए जिससे उसको दिक्कत का सामना न करना पड़े.

तीसरा नियम नकदी संकट को लेकर है. इन तीन बिन्दुओ पर आरबीआई किसी प्रकार का विचार और संसोधन नहीं करना चाहती है. जबकी सरकार की ओर से लगातार दबाव की स्थिति बनायी जा रही है, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अगर इस तरह का कुछ भी निर्देश आता है तो उर्जित पटेल इस्तीफ़ा दे सकते है.

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