कोरोना महामारी को नियंत्रित करने में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की भूमिका – प्रोफेसर डॉ योगेन्द्र यादव

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Image credit- social media

इस समय देश कोरेना की महामारी के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा है. पक्ष-विपक्ष आपसी हमले छोड़ कर अपने-अपने स्तर से कोरेना के संबंध में देश – प्रदेश की जनता को जागरूक भी कर रहे हैं. उदाहरण के तौर पर हम उत्तर प्रदेश को लेते हैं। यहाँ पर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है.

और समाजवादी पार्टी विपक्ष की भूमिका निभा रहे है. आम दिनों में भाजपा और समाजवादी पार्टी के रिश्ते बेहद तल्ख होते हैं। सत्ता में रहने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उनके मंत्री, संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता कोई ऐसा नहीं चूकते, जहां भी मौका मिलता है, समाजवादी पार्टी पर हमला कर देते हैं, भले गड़े मुर्दे क्यों न उखाड़ना पड़े । यही हाल समाजवादी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, उनके सहयोगी विधायकों/विधान परिषद सदस्य, संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भाजपा पर लगातार हमले करते हैं.

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लेकिन कोरेना की महामारी में पक्ष क्या? विपक्ष क्या ? सभी एक साथ खड़े हैं. सरकार, मुख्यमंत्री, उनके सहयोगी तो लगातार प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों को प्रसारित करने में लगे ही हुए हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर, उनके सभी सहयोगी और कार्यकर्ता भी इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं.

20 मार्च, 2020 को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यदादव ने देश और प्रदेश की अवाम से अपील यह अपील की –
1. हाथों को साफ़ व मुँह को ढक कर रखें ।
2. मोबाइल भी साफ़ करें व इधर-उधर न रखें।
3. लोगों से कम से कम मिलें।
4. अनावश्यक काम से न बाहर निकलें, न बाहर का खाएं ।
5. सार्वजनिक परिवहन से बचें अपने स्वयं के वाहन साइकिल, बाइक, कार को अधिक से अधिक अपनाएं.

इसके बाद 22 मार्च को फिर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार, प्रशासन और अपने पदाधिकारियों/नेताओं/कार्यकर्ताओं से अपील की – लोगों के बड़े शहरों से गाँव की ओर गमन करने की वजह से कोरोना का ख़तरा और भी बढ़ गया है. यूपी के लोक कलाकारों से अपील है कि वो अवधी, ब्रज, बुंदेली व अन्य बोलियों में कोरोना से बचने के उपायों का मोबाइल से प्रसार करें, जिससे गाँव की जनता सरलता से इन उपायों को समझकर अपनी रक्षा कर सके.

यहीं पर वे नहीं रूके, उसके अगले दिन यानि 23 मार्च, 2020 को उन्होने जनता की फिक्र और उनके बीच में चल रही ऊहापोह का जिक्र करते हुए कहा कि कोरोना के कारण जनता में व्याप्त असमंजसता व आशंका दूर करने के लिए सरकार को तुरंत एक स्पष्टीकरण देना चाहिए कि वो कोरोना के रोकथाम के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा दिए गए निर्देशों का स्वयं भी पालन कर रही है व जनता को भी जागरूक कर रही है व उसके अनुसार इंतज़ाम भी कर रही है.

इसके साथ ही उन्होने प्रदेश और देश के कारोबारियों की बात उठाते हुए कहा कि देश के कारोबारियों, वेतनभोगियों और चार्टर्ड अकाउंटेंटो पर कोरोना के अलावा वित्त वर्ष के अंतिम सप्ताह का भी दबाव है. सरकार को तत्काल बिना किसी अतिरिक्त दण्ड व शुल्क के कर व रिटर्न संबंधी अतिरिक्त समय व नियमों में ढील की घोषणा करनी चाहिए व करदाताओं को सरकारी भय से मुक्त करना चाहिए.

24, मार्च, 2020 को उन्होने जनता का पक्ष रखते हुए कहा कि कोरोना के ख़तरे को भाँपकर जिस प्रकार जनता घर से न निकल कर सहयोग कर रही है, वो सराहनीय है. अब सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वो आवश्यक वस्तुओं ‘दूध, अनाज, सब्ज़ियों व मरीजों के लिए फल व दवा’ के बेतहाशा बढ़ते मूल्यों पर लोहिया जी की ‘दाम बांधो’ नीति लागू करके अफ़रातफ़री मचने से रोके.

इसके साथ ही साथ कोरेना के उन्मूलन में सक्रिय भागीदारी कर रहे लोगों का पक्ष रहते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार कोरोना की जाँच, इलाज व देखरेख में लगे चिकित्सकों को ही नहीं बल्कि नर्स, वार्ड-स्टाफ़, लैब टेक्नीशियन, ऑपरेटरों, ऑफिस-एडमिन स्टाफ़, स्वच्छता व सुरक्षाकर्मियों को भी तुरंत प्रोटेक्शन किट उपलब्ध कराए जिससे कि वे शारीरिक व मानसिक रूप से सुरक्षित महसूस करते हुए सेवाएं दे सकें.

इसके अलावा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर आज समाजवादी पार्टी के अधिकांश जनप्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी उपलबब्ध निधि से मुक्त रूप से दान देकर एक मिसाल कायम की है.

लेकिन देखने में आ रहा है कि अब भी कुछ समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और नेता कोरेना के बारे में जन-जागरूकता फैलाने के बजाय, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मीन-मेख निकालने में लगे हुए हैं. उन्हे अपने एकमेव नेता अखिलेश यादव का अनुसरण करना चाहिए. जिससे भविष्य में कोई यह न कह सके कि आपातकाल की स्थिति में भी समाजवादी राजनीति कर रहे थे.

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प्रोफेसर डॉ योगेन्द्र यादव
पर्यावरणविद, शिक्षाविद, भाषाविद,विश्लेषक, गांधीवादी /समाजवादी चिंतक, पत्रकार, नेचरोपैथ व ऐक्टविस्ट

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