उत्तर प्रदेश के शहरों में कहर बरपाने के बाद कोरोना वायरस का संक्रमण गावों और कस्बों में लोगों की जान ले रहा है. हालत ये है कि यूपी में बहने वाली बड़ी नदियों में शव बह रहे हैं या नदियों के किनारों में दफन हैं. ऐसी एक दो नहीं कई तस्वीरें और वीडियो हैं जो सरकार के दावों की पोल खोल रही हैं. ऐसा ही एक मामला आज उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से सामने आया.

बलिया जिले के रहने वाले युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने बताया कि आज जब वो दोपहर में स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी के साथ मालदेपुर मोड़ के पास गंगा नदी में बने पीपे के पुल पर पहुंचे तो देखा कि एक लावारिस लाश पीपे के पुल की रस्सी में फंसी हुई है. ये नजारा देखकर वहां पर काफी संख्या में लोग जमा हो गए.

रोहित सिंह ने बताया कि हम लोगों ने एक नाविक को बुलाकर उस शव को निकलवाने का प्रयास किया मगर वो रस्सी से छूटते ही गंगा की तेज धारा में बहकर दूर चला गया जिससे कि उसका अंतिम संस्कार नहीं करवा पाए.

युवा चेतना संयोजक ने ये दृश्य देखने के बाद केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि कहां गए वो हिंदू धर्म के कथित ठेकेदार जो भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की बड़ी-बड़ी बातें किया करते थे.

उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश का मुख्यमंत्री एक सन्यासी हो उस प्रदेश में हिंदुओं की ऐसी दुर्दशा हो गई है कि न तो उन्हें जीते जी इलाज मिल रहा है और ना ही मरने के बाद सम्मानजनक अंतिम विदाई.

रोहित सिंह ने कहा कि भाजपा के लिए धर्म राजनीति का विषय है, उन्हें सिर्फ चुनाव के समय धर्म याद आता है और वोट मिलने के बाद वो सत्ता का सुख भोगने में मस्त हो जाते हैं. रोहित सिंह ने कहा साल 2022 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में जनता इन धर्म के कथित ठेकेदारों को सबक सिखाएगी और प्रदेश में सत्तापरिवर्तन करेगी.

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