राजद में संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया आखिरी दौर में हैं. एक सप्ताह के भीतर ही बिहार में लालू प्रसाद यादव के सबसे बड़े वफादार की तलाश पूरी हो जाएगी.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डा. रामचंद्र पूर्वे के हाथों में अगले तीन वर्षों तक पार्टी कमान रहेगी. पांचवी बार में भी डा. रामचंद्र पूर्वे की ही ताजपोशी तय मानी जा रही है. लालू परिवार के प्रति वफादारी, बौद्धिक क्षमता, सहिष्णुता, समाजवादी चरित्र और सामाजिक समीकरण दूसरे वफादारों पर फिर भारी पड़ रहे हैं.

राजद के प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में वैसे तो करीब दर्जन भर दावेदार हैं. किंतु लालू परिवार की अपेक्षाओं के अनुरुप किसी भी प्रर्दशन को पूर्व से बेहतर नहीं माना जा रहा है. यही कारण है कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन से कुछ दिम पहले लालू परिवार में पूर्वे की काबिलियत को कसौटी पर परखकर देखा जा रहा है.

एक साल के ही भीतर ही बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं. जिसमें लालू परिवार को कठिन दौर से गुजरना है. लोकसभा चुनाव में राजद के बुरी तरह से हारने के बाद ये पहला मौका होगा जब तेजस्वी यादव के लिए दोबारा उठ खड़े होने के लिए एक बेहतर मौका होगा.

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