उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा पत्रकारों पर की गई कार्रवाई के बाद मीडिया और यूपी सरकार आमने सामने आ गई है. पत्रकारों पर हुई कार्रवाई के विरोध में दिल्ली में पत्रकारों ने एक मार्च भी निकाला था. पत्रकारों की संस्था एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी पत्र जारी करते हुए यूपी सरकार के रवैये की निंदा की थी.

सोशल मीडिया पर भी लोग पत्रकार के समर्थन में लिख रहे थे. मामला सर्वोच्य अदालत की चौखट तक जा पहुंचा. शीर्ष अदालत ने पत्रकार को राहत देते हुए उसकी रिहाई के आदेश दे दिए. मौका गनीमत देख कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी इस मामले में कूद पड़े और तंज करते हुए ट्वीट कर डाला.


ट्वीट में उन्होंने लिखा कि अगर हर पत्रकार जो मेरे खिलाफ फर्जी आरोप लगाकर, आरएसएस और बीजेपी का प्रायोजित एजेंडा चलाते हैं, अगर उन्हें जेल में डाल दिया गया तो न्यूज़ पेपर और न्यूज़ चैनलों में स्टाफ की कमी पड़ जाएगी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मूर्खतापूर्ण रवैया अपना रहे हैं, गिरफ्तार किए गए पत्रकारों को तुरंत रिहा करने की जरूरत है

बता दें कि कानपुर की रहने वाली एक युवती ने सीएम आवास के बाहर पुहंच कर ये दावा किया था कि वो सीएम योगी से प्रेम करती है और वो उनसे वीडियो कॉल पर बात भी करती है.

इसके बाद कनौजिया ने उस युवती का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा कि इश्क छुपता नहीं छुपाने से योगी जी. इसके बाद यूपी पुलिस ने सीएम की छवि खराब करने के आरोप में प्रशांत कनौजिया सहित तीन पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया था.

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