हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड के चैयरमैन ने मोदी सरकार पर कसा तंज कहा- आप तो अम्बानी के लिए काम करते है

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राफेल डील को लेकर पूरे देश में मोदी सरकार के खिलाफ अलग अलग सुर सुनाई दे रहे है. कोई मोदी सरकार को पाक साफ़ बता रहा है तो कोई इस सरकार को अनसुनी सरकार बताते हुए सरकार की नीतियों पर तंज कस रहा है. अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार से कह दिया है कि आप 10 दिनों के भीतर सीलबंद लिफाफे में राफेल डील से सम्बंधित जानकारी मुहैया कराएं.

इसी बीच हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड के चेयरमैन ने कहा- मैं राफेल के बारे में कुछ नहीं बोल सकता क्यूंकि मैं नहीं जानता कि ये डील कब रद्द कर दी गयी और इसके पीछे कारण क्या थे?  आर माधवन ने कहा – मैं नहीं  जानता कि इस डील को रद्द करने   के पीछे सरकार की मंशा क्या थी.

उनके इस बयान से साफ़ पता चलता है कि जब डील रद्द की गयी तो उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गयी. वह सीधे तौर पर राफेल पर कुछ भी बोलने के लिए राजी नही हुए.

बीबीसी ने राफेल डील के मुद्दे को लेकर जब सवाल पूछे तो उन्होंने साफ़ साफ़ कह दिया जो हमें बोलने था वह हमने संसद में बोल दिया, इससे ज्यादा कुछ नहीं है. कीमत की जानकारी पर वह बोली मैं इस मुद्दे से जुड़ी हुई कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकती और ना ही सर्कार के द्वारा चाहती हूँ.

राहुल गाँधी के बारे में सवाल करते हुए जब पूछा गया कि राहुल गाँधी तो अपनी हर रैली में इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की भरपूर कोशिश करते है. तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा वह प्रत्येक रैली में अलग अलग कीमत बताते है. जो निराधार है उनकी बातों पर देश को विश्वाश नहीं होता है.

बता दे कि राफेल डील यूपीए शासनकाल में हुई थी. उस समय 12 दिसंबर 2016 को 126 राफेल विमानों की खरीद की बात हुई थी, उस समय इसकी कीमत 526 करोड़ रुपये आंकी गयी थी. उस डील में 18 विमान खरीद में मिलते जबकि 108 विमानों को एचएएल और डसौल्ट के साथ मिलकर बनाने की बात हुई थी.

प्रधानमंत्री के रूस दौरे में यह डील रद्द कर दूसरी डील की गयी जिसमें 36 विमान खरीदने की बात हुई. इसमें एक विमान की कीमत 1670 करोड़ रुपये आंकी गयी. इसी डील को लेकर समूची कांग्रेस भाजपा के ऊपर हमलावर है.

 

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