राफेल मामले की सीबीआई जॉच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पहले सीबीआई को अपना घर तो…

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राफेल खरीद में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जॉच, और एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरूण शौरी, यशवंत सिन्हा और प्रशांत भूषण की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस यू यू ललित, जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने कहा कि पहले सीबीआई को अपना घर तो संभाल लेने दें.

कोर्ट ने राफेल खरीद की प्रक्रिया, उसकी कीमत और ऑफसेट पार्टनर के चयन के बारे में भी सरकार से विस्तृत जानकारी सीलबंद लिफाफे में मांगी है. सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने कहा कि प्रक्रिया और पार्टनर के चयन की जानकारी तो दी जा सकती है मगर की मतों के बारे में नहीं बताया जा सकता यह गोपनीय है. दरअस्ल राफेल खरीद की प्रक्रिया यूपीए सरकार के समय से चल रही थी उस मनमोहन सरकार ने फ्रांस के साथ 100 से अधिक राफेल विमानों की खरीद के लिए करार किया था.

केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद यूपीए सरकार के समय हुए पुराने समझौते को रद्द करके पीएम मोदी ने 36 विमानों को खरीदने का नया करार किया. अब आरोप ये है कि मोदी सरकार ने तीन गुना अधिक दाम पर राफेल विमान खरीद रही है, यही नहीं भारतीय विमान निर्माता कंपनी एचएएल को हटाकर नियमों का उल्लंघन करते हुए रिलायंस डिफेंस को नया ऑफसेट पार्टनर चुन लिया गया है.

राफेल पर सरकार संसद से लेकर सड़क तक घिरी हुई है. मोदी सरकार का कहना है कि किसी भी तरह का कोई भ्रष्टाचार नहीं है और न ही किसी नियम का उल्लंघन हुआ है. विपक्ष के आरोप बेबुनियाद हैं यह सरकार को बदनाम करने की एक सोची समझी साजिश है.

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