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युगपुरुष स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड़ को दुनिया की सबसे खूबसूरत धरती मानते थे. हिमालय की गोद में बसे हुए इस राज्य की ऐसी खूबियां ही रही है कि जहां महान विभूतियों ने तपस्या की और आत्मज्ञान को हासिल किया. उत्तराखंड से स्वामी विवेकानंद की कई स्मृतियां जुड़ी हुई हैं.

साल 1888 में नरेंद्र ने हिमालयी क्षेत्र की पहली यात्रा शिष्य शरदचंद्र गुप्त के साथ शुरु की थी.ऋषिकेश में कुछ समय रहने के बाद वापस लौट गए थे. स्वामी विवेकानंद ने दूसरी बार यात्रा जुलाई 1890 में की थी, तब वे अयोध्या से पैदल नैनीताल पहुंचे थे.

स्वामी जी ने तीसरी यात्रा शिकागो से वौपस लौटने के बाद साल 1897 में की. अल्मोड़ा पहुंचने पर लोधिया से खचांजी मोहल्ले तक पुष्प वर्षा की गई थी.

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्वमाी विवेकानंद की स्मृति दिवस पर ट्वीट करते हुए लिखा कि “भारत के लाखों लोग अपने सूखे हुए गले से जिस चीज के लिए बार-बार गुहार लगा रही है वो रोटी है. वो हमसे रोटी मांगते हैं, लेकिन हम उन्हें पत्थर पकड़ा देते हैं. भूख से मरती जनता को धर्म का उपदेश देना उसका अपमान है.” स्वामी विवेकानन्द जी के स्मृति दिवस पर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि.

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