प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कारगिल दिवस पर देश के सैनिकों की बहादुरी को याद किया. मन की बात में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल का युद्ध जिस परिस्थिति में हुआ वो भारत कभी भूल नहीं सकता है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बड़े मंसूबे पालकर ये कदम उठाया था.

प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत की भूमि हथियाने और अपने यहां चल रहे आंतरिक कलह से ध्यान भटकाने के लिए ये दुस्साहस किया था. उन्होंने कहा कि दुष्ट का स्वाभाव ही होता है हर किसी से बिना वजह दुश्मनी लेना.

पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे स्वाभाव के लोग जो हित करता है उसका भी नुकसान पहुंचाते हैं. भारत की मित्रता के जवाब में पाकिस्तान ने पीठ में छुरा घोंपने की कोशिश की थी. लेकिन इसके बाद भारत ने जो पराक्रम दिखाया वो पूरी दुनिया ने देखा.

उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें कारगिल जाने और वीर जवानों के दर्शन का सौभाग्य मिला था. उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सन्देश को याद करते हुए कहा कि अटल जी ने कहा था कि कारगिल युद्ध ने हमें एक मन्त्र दिया है. ये मन्त्र था कि कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले हम ये सोचें कि क्या हमारा ये कदम उस सैनिक के सम्मान के अनुरूप है, जिसने उन दुर्गम पहाड़ियों में अपने प्राणों की आहुति दी थी.

प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध की परिस्थिति में, हम जो बात कहते हैं, करते हैं, उसका सीमा पर डटे सैनिक के मनोबल पर उसके परिवार के मनोबल पर बहुत गहरा असर पड़ता है. ये बात हमें कभी भूलनी नहीं चाहिए और इसलिए हमारा अचार, हमारा व्यवहार, हमारी वाणी, हमारे बयान, हमारी मर्यादा, हमारे लक्ष्य, सभी कसौटी में  ये जरुर रहना चाहिए. हम जो कर रहे हैं, कह रहे हैं, उससे सैनिकों का मनोबल बढे. उनका सम्मान बढ़े.

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