मेरे पहले प्यार का वो हसीन एहसास जो मेरा न हो सका, जरूर पढ़ें ये दिलचस्प कहानी…

    0


    बात उस समय की है जब मैनें बारहवीं पास करने के बाद डिग्री कॉलेज में दाखिला लिया. मैं थोड़ा शांत स्वभाव का सीधा साधा लड़का था. मैं बहुत जल्दी किसी में घुल मिल नहीं पाता था इस कारण अक्सर लोग मुझे थोड़ा घमंडी समझते थे. लेकिन इन सब बातों का मुझ पर बहुत ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता था. मैं अपने स्वभाव से संतुष्ट था.

    कुछ समय बीतने के बाद मेरे कुछ दोस्त बन गए जिनके साथ मैं बहुत ज्यादा घुल मिल गया. अब तो जैसे वो मेरी जिंदगी का हिस्सा ही बन गए हों. मेरे कॉलेज की एक लड़की जो कि बहुत हॅसमुख स्वभाव की थी धीरे-धीरे मेरी उससे भी दोस्ती हो गई. शुरू में तो कम ही बातचीत होती थी मगर कुछ दिनों के बाद वो मेरी सबसे ख़ास दोस्त बन गई, या यूॅ कहूॅ कि दोस्त से भी ज्यादा हो गई.

    अब हालत यह हो गई कि एक दिन भी उसको देखे बिना या उससे बात किए बिना मुझे चैन नहीं पड़ता था. धीरे-धीरे मुझे कब उससे प्यार हो गया पता ही नहीं चला. अब मेरी हालत यह हो गई कि मुझे उसके बिना एक पल भी अच्छा नहीं लगता था. एक दिन उस लड़की ने मुझे बातों-बातों में कहा कि मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूॅ मगर वादा करो कि तुम मेरी बात का बुरा नहीं मानोगे और मुझसे हमेशा वैसे ही मिलते रहोगे जैसे कि आज तक मिलते आए हो.

    यह सब बातें सुन कर मेरे मन में थोड़ी घबराहट तो हुई मगर मैनें अपने आप को संभालते हुए उससे वादा किया कि जैसा तुम चाहती हो वैसा ही मैं करूंगा. यह बात हो ही रही थी कि अचानक उसके घर से फोन आ गया और उसने मुझसे कहा कि अभी मुझे जाना होगा अब मैं तुमसे कल बात करूंगी. खैर मैं उसको रोक नहीं सका क्योंकि उसको उस समय घर जाना बेहद ज़रूरी था उसके जाने के बाद मैं भी अपने घर आ गया मगर मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था.

    मन में हज़ार तरह के सवाल उठ रहे थे. मैं बस यही सोंच रहा था कि किसी तरह अगला दिन हो और मैं उससे बात करूं. सही सोचते-सोचते कब रात गुज़र गई मुझे पता ही नहीं चला. सुबह मैं जल्दी उठा और फटाफट तैयार होकर समय से पहले ही कॉलेज पहुॅच गया. अब मेरी ऑखें उसका ही इंतेजार कर रही थी. थोड़ी ही देर बाद मेरा इंतेज़ार खत्म हुआ और वो मेरे पास आकर रोज की तरह बोली गुड मार्निंग, यह सुनकर जैसे मेरी पूरी उलझन ही थोड़ी देर के लिए खत्म सी हो गई. मैनें बिना देर लगाए ही उससे कहा कि चलो हमें तुमसे वो बातें करनी हैं जिसका कल तुमने ज़िक्र किया था.

    उसने मुझे बताया कि वो एक लड़के से बहुत प्यार करती है और उससे ही शादी करना चाहती है मगर न तो वो लड़का और न ही मेरे घरवाले इस शादी के लिए तैयार हैं वो बहुत परेशान थी. ये सब सुन कर तो जैसे मेरे पैरों तले ज़मीन नही खिसक गई हो इससे पहले कि मैं अपने प्यार का इज़हार उससे कर पाता उसने मुझे अपनी बात कहने का मौका ही नहीं दिया. अब मैं बहुत ही पसोपेश में था. फिर भी मैनें हिम्मत बांधी और उसकी हर मदद के लिए तैयार हो गया.

    मगर मैं कर भी क्या सकता था. कुछ दिनों के बाद उसने कॉलेज आना भी छोड़ दिया और पता नहीं कहॉ चली गई. उस दिन के बाद से आज तक मुझे उसका कुछ भी पता नहीं चला. इस तरह मैं अपने पहले प्यार का इज़हार भी नहीं कर पाया. आज भी जब उसकी याद आती है तो मेरी ऑखें नम हो जाती हैं.

    अगर आप के पास भी है कोई ऐसी कहानी, कविता, लेख, रोचक घटना, किसी मुद्दे पर आपके विचार या कुछ और जो आप हमसे साझा करना चाहते हैं तो हमें akhbaartimes@gmail.com जरूर भेजें. हम आपके विचारों को अपनी वेबसाइट के माध्यम से अपने पाठकों तक पहुॅचाने का प्रयास करेंगे.

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here