एनआईओएस डीएलएड प्रशिक्षित शिक्षक महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष मारूफ अंसारी ने कहा कि शिक्षा के प्रति सरकार का रवैया बहुत उदासीन है, शिक्षा दिन प्रतिदिन महंगी होती जा रही है. भारत में लगातार बढ़ती बेरोजगारी की वजह से युवा शिक्षा के प्रति उदासीन हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि रोजगार पर सरकार की योजना पूरी तरह से फेल है, भारत सरकार द्वारा डी एल एड प्रशिक्षित शिक्षक को डिग्री दे कर बेरोजगार बना दिया है जो शिक्षा के लिये घातक बनता जा रहा है.

देश में बेरोजगारी की दर कम किए बिना विकास का दावा करना कभी भी न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता. देश का शिक्षित बेरोजगार युवा आज स्थायी रोजगार की तलाश में है. ऐसे में बमुश्किल किसी निजी संस्थान में अस्थायी नौकरी मिलना भविष्य में नौकरी की सुरक्षा के लिए लिहाज से एक बड़ा खतरा है.

सरकार द्वारा सरकारी महकमों को पीपीपी स्वरूप में तब्दील कर देने और खुद अपनी जिम्मेदारी निभाने से पीछे हटने को लेकर शक बढ़ता है कि सरकार क्या करने वाली है. यह सब मिल कर सेवा क्षेत्र में बढ़ती जीडीपी पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना को दर्शाता है.

सरकार को देश के सेवा क्षेत्र में नए प्रयोग करने के साथ-साथ उसमें विस्तार करने की जरूरत है, ताकि नए पद सृजित किए जा सकें. नए सरकारी पद सृजित होंगे तो युवाओं को रोजगार मिलेगा. इससे देश की विकास दर रफ्तार पकड़ेगी. आज कृषि, प्रशासन, बैंक, बीमा, चिकित्सा, शिक्षा, रक्षा, साइबर सुरक्षा, तकनीकी और अनुसंधान क्षेत्रों में नए पदों पर भर्तियों की आवश्यकता है.

बहुराष्ट्रीय कंपनियों को यह समझ बखूबी है और इसी का फायदा उठाते हुए वे कर्मचारियों का शोषण कर रही हैं. कम तनख्वाह में व्यक्ति काम करने के लिए तभी तैयार होता है, जब उसको कहीं और काम मिलने में दिक्कत हो. इसी का फायदा आज निजी कंपनियां उठा रही हैं और लोगों की तनख्वाह लगातार कम होती जा रही है.

बेरोजगार युवाओं के तेजी से बढ़ती तादाद देश के लिए खतरे की घंटी है. नरेंद्र मोदी की सरकार को तुरंत इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्र व राज्य सरकारें भारी तादाद में रोजगार देने वाले उद्योग नयी नौकरियां पैदा करने में नाकाम रही हैं.

इस समस्या के समाधान के लिए कौशल विकास और लघु उद्योग को बढ़ावा देना जरूरी है. वहीं युवाओं को नौकरी के लायक बनाने के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग के जरिये कौशल विकास बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए. इसके साथ ही उद्योग व तकनीक संस्थान में बेहतर तालमेल जरूरी है.

सवाल यह भी है कि इन हालातों में आखिर देश के युवा कहां जाएं, क्या करें, जब उनके पास रोजगार के लिए मौके नहीं हैं, समुचित संसाधन नहीं हैं, योजनाएं सिर्फ कागजों में सीमित हैं. पहले ही नौकरियों में खाली पदों पर भर्ती पर लगभग रोक लगी हुई है, उस पर बढ़ती बेरोजगारी आग में घी का काम कर रही है.

पढ़े-लिखे लोगों की डिग्रियां आज रद्दी हो गई हैं, क्योंकि उन्हें रोजगार नहीं मिलता. सरकार को इस मसले को गंभीरता से लेना चाहिए. नए रोजगारों का सृजन करना जरूरी है. युवा देश का भविष्य है तो वह भविष्य क्यों अधर में लटका रहे?

मोदी सरकार ने कौशल विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे जरूर किये थे, लेकिन अब तक उसका कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका है. एक अनुमान के मुताबिक भारत में प्रतिदिन 400 नए रोजगारों का सृजन किया जाता है.

यह हमारी बेलगाम रफ्तार से बढ़ती आबादी के लिहाज से ऊंट के मुंह में जीरा ही कहा जा सकता है. इसके मद्देनजर हमारी योजनाओं की प्राथमिकताओं में बेरोजगारी उन्मूलन को शामिल कर ठोस कदम उठाए जाएं.

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