मध्य प्रदेश चुनाव- 58 साल से भाजपा में रहे इस नेता ने छोड़ा पार्टी का साथ, शामिल हुए कांग्रेस में

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मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले बगावत का दौर शुरू हो गया है, भाजपा हो या कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेताओं में बगावत का दौर शुरू है. कोई टिकट ना मिलने से परेशान है तो कोई अपने परिवारीजनों के टिकट ना मिलने से परेशान है.

लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन हो या बाबूलाल गौर हो, जिन्होंने टिकट ना मिलने पर निर्दलीय ही मैदान में उतरने का दमखम दिखा दिया था, जिसके बाद उनकी बहू कृष्णा गौर को टिकट ना मिलने पर कांग्रेस में जाने का भी अंदेशा जाहिर कर दिया था, जिसके बाद उनकी बहू को तो टिकट दे दिया गया लेकिन बाबूलाल गौर का टिकट कट गया.

चुनाव के 20 दिन पहले भाजपा का दामन छोड़ कर कांग्रेस के साथ आने से मध्यप्रदेश में भाजपा को करारा झटका लगा है. बता दे कि प्रदेश में 28 नवम्बर को चुनाव है, जिसके पहले ही टिकट ना मिलने से नाराज सरताज सिंह फूट फूट कर रोते हुए नजर आए और कुछ ही देर बाद उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने की बात बताई.

सरताज सिंह को कांग्रेस ने होसंगाबाद से टिकट भी दे दिया है,इससे वह कांग्रेस को आभार देते हुए नजर आए और कहा कि मैंने 58 साल तक भाजपा में रहते हुए लोगों की सेवा की, इस बार पार्टी चुनाव ना लड़ाने के विचार में थी. जबकि मं राजनीति में रहते हुए लोगों की और सेवा करना चाहता था.

भाजपा के सिख चेहरे में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले की सिवनी-मालवा से दो बार विधायक रहे, वह केंद्रीय मंत्री भी बने, मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री पद पर रहे, एक बार वह होसंगाबाद से सांसद भी चुने गए.

उधर मध्य प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता अनिल सौमित्र  ने कहा – सरताज सिंह की तरफ से ऐसा करना बेहद अशोभनीय दर्शाता है, पार्टी ने उन्हें क्या नहीं दिया, सब कुछ देने के बाद भी इस प्रकार का कृत्य उनके ऊपर शोभा नहीं देता है.

इसके पहले ही सरताज सिंह को ये बता दिया गया था कि इस बार आपको इस विधानसभा सीट से टिकट नहीं दिया जाएगा. इसके बाद से ही वह दूसरी जगह जाने के लिए स्थान बना रहे थे.

 

 

 

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