जानें क्यों खास है ये करवाचौथ, पूरे 27 साल बाद बना ये महायोग

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हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार सुहागिनों का सबसे बड़ा मनाया जाने वाला त्यौहार करवाचौथ होता है. इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. दिन भर उपवास के बाद शाम को चंद्रमा के दर्शन के साथ अपने पति को देखकर उनके हाथ से ही पानी पीकरअपना व्रत तोड़ती हैं.

आज के डिजिटल युग में ऐसी महिलाएं जिनके पति कहीं दूर हैं वह वीडियो काल के माध्यम से अपने पति को देखकर व्रत तोड़ने की तैयारी में हैं. बदलते युग में डिजिटल क्रांति की वजह से यह संभव हो पाया है. पहले जब ऐसी सुविधा नहीं थी तो पत्नि अपने पति की तस्वीर को देखकर अपना व्रत तोड़ती थी. इस बार के करवाचौथ में तीन ऐसे महायोग बन रहे हैं जो इससे पहले वर्ष 1991 में बने थे. आगे ऐसा महायोग सोलह साल बाद बनेगा.

इस महायोग में अमृत सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि और उच्च राशि चंद्रमा योग शामिल है. 27 अक्टूबर की शाम 8ः19 बजे से ही रोहिणी नक्षत्र लग जाएगा, इस करवाचौथ पर रोहिणी और चंद्रमा का मिलन होगा. रोहिणी को चंद्रमा की पत्नि माना जाता है. इसी मिलन की बेला में करवाचौथ का पर्व मनाया जाएगा.

इस बार पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम 5ः40 से 6ः47 के बीच है. चंद्रमा निकलने का समय पूरे भारत में लगभग 7ः28 से 8ः14 के बीच है. इस दिन सुहागिन महिलाएं ठीक उसी तरह सज-धज कर तैयार होती हैं जैसे कि अपनी शादी के दिन तैयार होती हैं.

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