मायावती के बेहद करीबी ने ही पार्टी के विधायकों को तोड़ने में निभाई भूमिका, खुद खोला राज

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काँशीराम की नीतियों को जोर शोर से बढ़ाने वाली मायावती इस समय अपने ही लोगों की साजिश का शिकार होती हुई जा रही है. इस तरह की घटना पहली बार नहीं हुई, ऐसा पिछले कई सालों से होता हुआ नजर आ रहा है. जिस समय लगता है कि पार्टी मजबूती के साथ खड़ी है उस समय ही कोई नेता पार्टी को छोड़कर चला जाता है या पार्टी से निलंबित कर दिया जाता है. जिससे पार्टी और विचारधारा को कड़ा झटका लगता है.

राजस्थान में कुछ यूं लिखी गई पटकथा

राजस्थान में बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा तो हाल ही में हुई लेकिन इसकी पटकथा पिछले कई महीने से लिखी जा रही थी. इस पटकथा को लिखने में मायावती के बेहद करीबी माने जाने वाले नदबई विधानसभा से विधायक जोगिंदर अवाना ने काम किया है.

बसपा के 6 विधायकों को कांग्रेस के पाले में मिलाने के लिए मुख्य रुप से भूमिका अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम अशोक पायलट ने निभाई. एक मीडिया चैनल में छपी खबर के अनुसार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के घर पर 1 अगस्त को रात्रिभोज का इंतजाम किया गया था, इस समय से ही इस षडयंत्र की शुरुआत हो गई थी.

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7 अगस्त को सचिन पायलट की मंजूरी मिलने के बाद इसको अंतिम स्वरुप दिया गया. इसके बाद ही बसपा के सभी 6 विधायक कांग्रेस में शामिल हुए.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने घर में ही सभी बसपा के विधायकों को रात्रिभोज के लिए बुलाया था. इसमें बसपा के विधायक जोगिंदर अवाना भी अपने परिवार के साथ शामिल हुए. यहां से शुरु हुआ सिलसिला पार्टी के विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद  ही रुका. परविंदर अवाना इस दौरान कांग्रेस के कार्यक्रमों में भी दिखाई देने लगे थे.

19 अगस्त को पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने जब पर्चा दाखिल किया तो परविंदर अवाना प्रस्तावक बनें. 21 अगस्त को पूर्व पीएम राजीव गाँधी की जयंती पर जयपुर में हुए कार्यक्रम में जोगिंदर अवाना अपने समर्थकों के साथ दिखाई दिए. सचिन पायलट की जन्मदिन पर भी वह 7 सितंबर को घर-परिवार के साथ बधाई देने पहुंचे, इसके एक सप्ताह के बाद ही कांग्रेस में शामिल होने की 16 सितंबर को बसपा के सभी विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा कर दी गई.

पार्टी छोड़ने की वजह के बारे में बताते हुए कहा कि वह पार्टी मुखिया और पार्टी की नीतियों के चलते नाराज चल रहे थे निकाय चुनावों में चल रही लापरवाही को लेकर कई बार जोगिंदर अवाना ने बसपा सुप्रीमों से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया. विधायक अवाना ने कहा कि बसपा में इस समय कोआर्डिनेटर हावी हो चुके हैं जो जनप्रतिनिध की आवाज को भी पार्टी की मुखिया तक नहीं पहुंचने देते हैं.

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