अगर कोरोना पर शीघ्र नियंत्रण नहीं पाया गया, तो देश में पैदा होगी आर्थिक आपातकाल की स्थिति – प्रोफेसर डॉ योगेन्द्र यादव

0
image credit-social media

इस समय पूरा विश्व कोरोना की महामारी की चपेट में है. विश्व के कई देशों में हालात बद से बदतर हो चुके हैं. मेडिकल विज्ञान में विशिष्टता प्राप्त इटली में भी इतनी मौते हुई हैं कि लोग यहाँ-वहाँ पड़े हुए हैं. इन हालातों को देख कर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ऐतिहातन कड़े कदम उठा रहे हैं.

स्कूलों की छुट्टियाँ कर दी गई। सभी परीक्षाएँ निरंस्त कर दी गई. निजी कंपनियों में चौथाई पेमेंट पर अवकाश दे दिया गया, केवल इक्का-दुक्का जरूरी कर्मचारियों/अधिकारियों को ही बुलाया जा रहा है. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में भी फिफ़्टी – फिफ़्टी का फार्मूला लागू कर दिया गया. पुलिस/प्रशासनिक अधिकारियों/डाक्टरों/नर्सों/मेडिकल स्टोर्स से संबन्धित कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे हैं.

सभी छोटे-बड़े अस्पताओं की ओपीडी बंद कर दी गई है. सभी प्रभावित प्रदेशों और जिलों में लॉक डाउन घोषित कर दिया गया है. जिसकी वजह से जरूरी सामानों को दुकानदार ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं. सरकार मूल्य नियंत्रण की बात तो कर रही है, लेकिन व्यावहारिक रूप से वह लागू नहीं हो पा रहा है.

image credit-social media

अभी तक केंद्र और प्रदेश सरकारों द्वारा किसी भी विशेष राहत पैकेज घोषित नहीं किया गया है. इससे साफ जाहीर है कि सरकार का खजाना भी खाली है. कुछ को अगर छोड़ दें, तो अधिकांश जनप्रतिनिधियों द्वारा प्राप्त सरकारी निधि राशि में से ही दान दिया जा रहा है. सरकार को लाभांश देने वाले अधिकांश उपक्रम और गतिविधियां ठप पड़ गए हैं. जिससे धनागम के सभी रास्ते अवरुद्ध या तीन चौथाई अवरुद्ध हो गए हैं.

विश्व स्वस्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ ) से जो निर्देश प्राप्त हो रहे हैं, उसके अनुसार कोरेना आपातकाल लंबा खिचने वाला है। अगर इस पर शीघ्र नियंत्रण नहीं पाया गया, तो सार्वजनिक उपक्रमों/ सरकारी कर्मचारियों/निजी उपक्रमों/कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ जाएंगे. विकास कार्य पूरी तरह ठप्प पड़ जाएगा. न सरकार के पैसा बचेगा और न यहाँ की जनता की जेबों में । और देश में आर्थिक आपात की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी.

image credit-social media

इस पर भी देश के प्रधानमंत्री/प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को भी चिंतन करना चाहिए. देश की जनता को भी कोरेना के खिलाफ खड़ा हो जाना चाहिए. उसे समाप्त करने के लिए जो भी एड़वायाजरी जारी की गई है, उसका स्वत: पालन करना चाहिए.

प्रोफेसर डॉ योगेन्द्र यादव
पर्यावरणविद, शिक्षाविद, भाषाविद,विश्लेषक, गांधीवादी /समाजवादी चिंतक, पत्रकार, नेचरोपैथ व ऐक्टविस्ट

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here