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समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव को पहली बार विधायक बनाने के लिए लोगों ने एक टाइम का खाना भी छोड़ दिया था. मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन के मौके पर बचपन के मित्र और सैफई गांव के 47 सालों से प्रधान पद की कुर्सी पर काबिज दर्शन सिंह यादव ने बताया कि ये बात साल 1967 विधानसभा चुनाव की है. जब नेता जी चुनाव लड़ने के लिए पैसों का जुगाड़ करने के लिए लगे हुए थे. लेकिन पैसों की व्यवस्था कहीं से नहीं दिखाई दे रही थी.

चुनाव प्रचार के दौरान ही एक दिन मुलायम सिंह के घर की छत पर एक बैठक की गई, जिसमें प्रत्येक जाति के लोगों ने सहभागिता की.इस बैठक में गांव के सोनेलाल ने कहा कि हम गांव वाले एक शाम का खाना नहीं खाएंगे तो आट दिनों तक मुलायम सिंह यादव की गाड़ी चल जाएगी. तभी सभी गांव वालों ने सोनेलाल के इस प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया.

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सभी के सम्मिलित होने का प्रयास ही था कि नेता जी पहली बार में ही जसवंतनगर विधानसभा से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे.

दर्शन सिंह यादव बताते हैं कि जब मुलायम सिंह को पहली बार टिकट मिला ता तो वह जनता के बीच वोट मांगने जाते थे तो कहते थे कि आपका एक वोट और एक रुपया ही हमें चुनाव में विजयी प्राप्त करा सकता है. हालांकि वह यह भी कहते थे कि अगर मैं चुनाव जीत गया तो आपका पैसा ब्याज सहित वापस लौटा दूंगा. इसी का नतीजा था लोग उन्हें दिल से चंदा देते थे.

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दर्शन सिंह ने कहा कि पहले हम लोग साईकिल से ही चुनाव प्रचार करते थे, फिर चंदों के ही पैसे से एक सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदी जिसमें धक्का लगाना पडता था. मुलायम सिंह को राजनीति में बहुत संघर्ष करना पड़ा. मुलायम सिंह को राजनीति में लाने का श्रेय नत्थू सिंह को जाता है जिन्होंने मुलायम सिंह के लिए अपनी ही सीट को छोड़ दिया था.

उन्होंने मुलायम सिंह को चुनाव लड़वाया और जितवा कर विधानसभा भी भेजा, वह कहते थे कि मुलायम सिंह पढ़े लिखे हैं उन्हें विधानसभा जाना चाहिए, हालांकि वहां के कुछ स्थानीय लोगों ने उनका विरोध किया था, लेकिन नत्थू सिंह के आगे किसी की नहीं चली.

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