बिहार की राजनीति में मंगलवार का दिन काला दिन कहा जा रहा है. विपक्ष विशेष सशस्त्र पुलिस बिल को सदन में पेश होने से रोकने की कोशिश कर रहा था. उसका कहना था कि इससे आम आदमी का अधिकार छीना जाएगा. जबकि सत्ता पक्ष का कहना था कि यह विशेष पुलिस बल है. इसका सामान्य पुलिस से कोई सरोकार नहीं है.

आरजेडी को बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, लॉ एंड ऑर्डर जैसी समस्याओं को लेकर विधानसभा घेराव मार्च निकालना था. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ मार्च निकाला. जेपी गोलंबर पर पुलिस बैरीकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ते हुए सभी कार्यकर्ता डाक बंगला चौराहे तक पहुंच गए.

पुलिस ने वाटर कैनन चलाकर कार्यकर्ताओं को बैरीकेडिंग से दूर हटाने की कोशिश की. ऐसे में आरजेडी कार्यकर्ताओं की तरफ से पत्थरवाजी शुरू हो गयी. पत्थरवाजी के बाद पुलिसबल ने लाठीचार्ज किया. जिसमें कई विधायकों को भी चोटें आई.

हंगामे के बाद पुलिस तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव को हिरासत में लेकर गाँधी मैदान थाने गयी. जिसके बाद दोनों को छोड़ा गया. मार्च को संभाल रहे मजिस्ट्रेट ने बताया कि जेपी गोलम्बर से मार्च निकालने का आदेश नहीं था. इसके बावजूद आरजेडी ने प्रतिबंधित क्षेत्र में मार्च निकाला. जिला प्रशासन ने जेपी गोलंबर की जगह गर्दनीबाग धरनास्थल पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी थी जिसे आरजेडी ने नहीं माना.

यह हंगामा यही नहीं थमा. विधानसभा में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक 2021 बिल लाया गया था, जिसके विरोध में आरजेडी विधायकों ने कॉपी को फाड़कर विधानसभा अध्यक्ष के ऊपर फेंक दी. बाद में सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी.

विधानसभा में रिपोर्टिंग टेबल को भी तोड़ दिया गया. 4 बजे से शुरू होने वाली कार्यवाही के लिए विधानसभा अध्यक्ष अपने चैंबर से निकलना चाह रहे थे तो आरजेडी विधायक दरवाजे पर ही जाकर बैठ गए. जब विधायक नहीं माने तो विधानसभा में डीएम और एसपी को बुलाया गया. डीएम एसपी ने समझाने की कोशिश की लेकिन विधायकों ने हाथापाई शुरू करदी. जिसके बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल सदन के भीतर बुलाया गया.

विधायकों ने जब विधानसभा अध्यक्ष को बाहर नहीं आने दिया तो मार्शल को विधायकों को हटाने का निर्देश दिया गया. मार्शलों ने विधायकों के नहीं हटने पर हाथ-पैर पकड़कर सदन से बाहर निकाला. विधायकों का कहना है कि पुलिस ने सदन के भीतर पिटाई भी की. आरजेडी विधायकों को सदन से बाहर निकालने के बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई.

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