साल 2012 में निर्भया के साथ हुए गैंगरेप के बाद भी देश में इस तरह की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है. जगह और नाम भले ही बदल जाए लेकिन बेटियों की हालत आज भी वैसी ही है. वैसे तो कहने को साल 2012 में निर्भया के साथ गैंगरेप करने वाले दोषियों को फांसी की सजा दे दी गई है लेकिन आज भी समाज में बहुत ऐसे लोग घूम रहे हैं जो कभी निर्भया तो कभी हाथरस की बेटी को अपना शिकार बना रहे हैं.

इन दरिंदों को कानून का भी कोई खौफ नहीं है. यूपी के हाथरस में एक दलित युवती के साथ चार दरिंदों ने ऐसी दरिंदगी और हैवानियत की जिससे पीड़ित युवती ने दिल्ली के सफदरगंज में दम तोड़ दिया. ये घटना विगत 14 सितंबर की है हाथरस के एक गांव में पिछले दिनों के ही सापेक्ष एक युवती अपनी मां के साथ जानवरों के लिए चारा लेने गई थी.

उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि ये दिन उसके जिंदगी का सबसे खौफनाक और जानलेवा दिम होने वाला है. इस दौरान खेत में गांव के कुछ दंबग युवक वहां पर आ धमके, लड़की ने खुद को उन दरिंदों से बचाने की कोशिश की, लेकिन चार युवकों के आगे वो पार नहीं पा सकी, चारों युवक बारी- बारी से युवती को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाते रहे.

बेटी की चीख-पुकार सुनकर मां खेत पर पहुंची तो आरोपी युवक वहां से फरार हो गएं, दरिंदगी के बाद आरोपियों ने क्रूरता की सभी सीमाएं को लांघ दिया. उन्होंने इस दौरान युवती को इतना बेरहमी से पीटा कि वो खुद के पैरों पर खड़ी भी नहीं हो पी रही थी, कुछ दिनों पहले ही दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में युवती को भर्ती कराया गया था जहां पर वो लगातार जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी. आखिरकार मंगलवार को उसने जिंदगी से हार मान ली और इस दुनिया का अलविदा कह दिया.

युवती का अंतिम संस्कार भी पुलिस की मौजूदगी में रात में ही कर दिया गया जिसके बाद विपक्ष सूबे की योगी सरकार पर हमलावर है, सपा नेता सुनील सिंह साजन ने कहा कि हाथरस में दरिंदगी की शिकार गुड़िया का पुलिस ने परिवार की मर्जी के बिना रातोरात अंतिम संस्कार कर दिया. योगीजी आप एक बेटी को गरिमापूर्ण जीवन तो नहीं दे सके और उसकी सम्मानजनक विदाई भी छीन ली? रात में हिन्दू अंतिम संस्कार नहीं करते? योगीजी या तो आप हिन्दू नही या सरकार कोई और चला रहा?

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