इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीस, रामपुर द्वारा पूर्व सांसद जयाप्रदा के खिलाफ 2019 में राजनीतिक विरोधियों पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में जारी किए गए गैर जमानती वारंट को रद्द कर दिया है.

न्यायमूर्ति ओमप्रकाश की एकल पीठ ने देखा कि पूर्व सांसद जयाप्रदा के खिलाफ दर्ज अपराध गैर संज्ञेय थे . पीठ का मानना था वर्तमान मामले में ये विवादित नहीं हैं कि आरोप पत्र धारा 171- जी-आईपीसी के तहत प्रस्तुत किया गया था. सीआरपीसी के साथ संलग्न अनूसूची स्पष्ट रुप से ये बताती है कि उनके द्वारा किए गए अपराध संज्ञेय है.

ट्रायल कोर्ट ने मामले में शिकायत के मामले के साथ आगे बढ़ाना चाहिए था. इसके बाद ही कानून के अनुसार नए सिरे से आदेश पारित करने के लिए इसे अदालत में वापस भेज दिया गया था. जया प्रदा ने समाजवादी पार्टी के नेता और इस समय रामपुर से सांसद आजम खान के खिलाफ एक्स-रे जैसी आंखे टिप्पणी करने के लिए एफआईआर दर्ज की गई थी.

जांच अधिकारी ने इस दौरान धारा 171-जी-आईपीसी के तहत अपराध के लिए आरोप पत्र को प्रस्तुत कियाय जिसके बाद फरवरी 2020 में एएसजे अदालत ने जया प्रदा के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था.

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