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देश के आर्थिक मोर्चे पर सरकार को दोहरा झटका लगा है. एक ओर जहां महंगाई दर बढ़ी है वहीं औद्योगिक उत्पादन घटा है. खाने पीने की चीजों के दाम बढ़ने से खुदरा महंगाई दर बढ़कर तीन साल का सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है.

एनएसओ की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य मुद्रास्फीति की दर 10.01 प्रतिशत पर पहुंच गई है. अक्टूबर महीने में ये दर 7.89 प्रतिशत थी. सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर महीने में औद्योगिक उत्पादन 2.1 प्रतिशत गिर गया.

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा है कि ये भाजपा सरकार की गलत आर्थिक नीतियों का नतीजा है कि महंगाई बढ़ती ही जा रही है. रोजमर्रा घरेलू प्रयोग आने वाली वस्तुओं से लेकर किसानों के खेती में इस्तेमाल होने वाली खाद, बीज, डीजल, बिजली आदि के रेटों में बेतहाशा वृद्धि ने किसानों के सामने आर्थिक संकट पैदा कर दिया है.

खाना-पीना दूभर हो गया है. गृहणियों की व्यथा अलग है. आटा, तेल, सब्जियों सहित प्याज के मूल्यों में वृद्धि जारी है. पट्रोल-डीजल सहित घरेलू उपयोग के गैस सिलेण्डरों में वृद्धि हो गई है.

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जन समस्याओं को सुलझाने के बजाय जीवन को जटिल बनाने में लगी है. लगता है कि भाजपा का वास्तविक एजेण्डा यही है. जनता चैन से न बैठ पाये.

भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियां जनता के लिए अभिशाप बन कर आयी है. भाजपा सरकार की गलत आर्थिक नीतियों एवं नोटबंदी और जीएसटी के कारण नौजवानों के भविष्य के सामने अंधेरी सुरंग है. दूर-दूर तक कुछ नहीं दिखता.

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अखिलेश ने कहा कि न रोजगार न नौकारी की सम्भावना है. छोटे कारोबार कुटीर लघु उद्योगधंधो में उत्पादन से लेकर रोजगार में भारी गिरावट आ गयी है. जीडीपी के आंकड़े तो और भी डरावने है.

जनसराकारों के असली मुद्दों से ध्यान हटा कर अनावश्यक सवालों के जरिये जनता को परेशानी में फंसाना, भाजपा अपनी उपलब्धि समझती है. भाजपा सरकार जिसे अपनी सफलता समझने लगी है उससे जनता दुःखी परेशान और आक्रोशित है. उत्तर प्रदेश की स्थिति तो बहुत खराब है.

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