अखिलेश यादव ने मोदी सरकार को घेरा, कहा नोटबंदी और जीएसटी से देश की अर्थव्यवस्था हुई चौपट

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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने देश की खराब अर्थव्यवस्था के लिए केंद्र की मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए नोटबंदी और जीएसटी के फैसले पर एक बार फिर से सवाल उठा दिए हैं.

उन्होंने कहा कि आज देश की अर्थव्यवस्था गहरे संकट के दौर से गुजर रही है. ये सब भाजपा सरकार की खराब नीतियों का नतीजा है जो अब जनता के सामने आ रहा है. नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों ने कारोबार जगत में तबा’ही ला दी है. छोटे और घरेलू अद्योग तो पहले ही बंद हो रहे थे मगर अब तो देश का आटो मोबाइल सेक्टर भी द’म तो’ड़ रहा है.

अखिलेश ने कहा कि  देश का विदेशी मुद्रा भण्डार 26 जुलाई 2019 को समाप्त सप्ताह में 72.7 करोड़ डालर घटकर 429.65 अरब डालर रह गया है. रूपए के कमजोर होने के कारण भारत की अर्थव्यवस्था फिसलकर सातवें स्थान पर आ गई है. सन् 1964 में भी भारत इसी स्थान पर था.

पीएम मोदी ने भारत को सन् 2024-25 तक पांच हजार अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने का बड़ा वादा किया है. लेकिन आर्थिक संकेत इस बात के हैं कि उनका यह दावा उनके और दावों की तरह थोथा वादा ही साबित होगा.

अपनी पहली सरकार में उन्होंने 2 करोड़ नौकरियां देने, किसानों की आय दुगनी करने, मंहगाई कम करने तथा भ्र’ष्टाचार पर अंकुश लगाने के वादे किए थे.

उन्होंने कहा कि सन् 2014 से 2019 तक स्वच्छ भारत, बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ, स्टार्ट अप और स्टैण्ड अप इण्डिया जैसे प्रोग्राम दिए थे जो सब नाकाम रहे. प्रतिव्यक्ति आय के मामले में सन् 2018 में 187 देशों में भारत का नम्बर 142 था.

श्रम ब्यूरों ने रोजगार सर्वेक्षण में कहा है कि पिछले छह वर्षों में लगभग 3.7 करोड़ कामगारों ने कृषि कार्य से तौबा कर ली है. कृषि कार्यों में लोगों की असुर’क्षा बढ़ी है.

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किसानों पर कुल 72 हजार करोड़ रूपए का कर्ज आंका गया है जबकि कारपोरेट घरानों पर बैंकों का 5 लाख करोड़ का भारत के उद्योगपतियों पर कर्ज बढ़ता जा रहा है. ऐसी स्थिति में उद्योग जगत में उत्पादन बढ़ने की आशा कैसे की जा सकती है. यह संकेत है कि गरीब, किसान, खेती-गांव भाजपा सरकार की प्राथमिकता में कितने नीचे हैं.

अखिलेश ने कहा कि भाजपा सरकार के नए भारत का सच यह भी है कि सन् 2018 में एक करोड़ दस लाख नौकरियां चली गईं. इस वर्ष अब तक रेलवे क्षेत्र में 3 लाख छंटनी हो चुकी हैं. आटो मोबाइल क्षेत्र की दुर्दशा चिंताजनक है.

जीएसटी के कारण वाहनों के 286 शोरूम इस वर्ष अप्रैल तक 18 माह की अवधि में बंद हो चुके हैं और 2 लाख से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है. इससे पूर्व 32 हजार कर्मचारी पहले ही घर बैठा दिए गए. यहां तक की स्टील सेक्टर में भी उत्पादन में गिरावट आई है.

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