अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ का वर्चुअल सम्मेलन आज संपन्न हो गया. सम्मेलन में देश के राजनीतिक हालात से लेकर बिहार विधानसभा चुनाव, गरीबी, बेरोजगारी, कोरोना और एफडीआई के विषय पर विस्तृत चर्चा हुई. इसमें देश के अलग-अलग राज्यों से पिछड़ा संघ के कार्यकर्ताओं, और बुद्धिजीवियों ने वर्चुअल तरीके से भाग लिया.

सम्मेलन को संबोधित करते हुए पिछड़ा वर्ग संघ के अध्यक्ष इन्द्र कुमार सिंह चन्दापुरी ने कहा कि नई सरकार में पुरानी नीतियां ही चला रही है जिसके कारण सरकार के सभी स्तर की नौकरियों की नियुक्तियों में, स्थानांतरण व पदोन्नति में दाखिला एवं छात्रवृत्तियों में, यहां तक की मेधावियों की सूची में शीर्ष पर आने वाले पिछड़े वर्गों के अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में शामिल करने के सिलसिले में पिछड़े वर्गों के संवैधानिक अधिकारों को पूरी तरह कुचला जा रहा है.

संघ ने इन समस्याओं को दूर करने हेतु देश में मंडल आयोग को पूर्णतः लागू करने में आ रही कानूनी अड़चनों को शीघ्र दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भेजा है किन्तु उस पर कोई कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि इसे लेकर पिछड़े वर्गों में काफी आक्रोश है और यह मुद्दा आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा.

चन्दापुरी ने कहा कि 2019 में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी लोकसभा में बताया था कि 2021 में ओबीसी की जनगणना की जाएगी किन्तु इस मुद्दे से सरकार मुकर गई है जो राष्ट्र की प्रगति के लिए घातक है. पिछड़ा संघ के अध्यक्ष ने कहा कि नई आर्थिक नीति के लागू होने के बाद से भारत गरीबी की कब्रगाह बन गया है. यहां नब्बे प्रतिशत लोग गरीबी की गर्त में धकेल दिए गए हैं.

 

उन्होंने कहा कि ऑक्सफेम की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अरबपतियों ने 20,913 अरब रुपए की कमाई की है जो भारत सरकार के बजट के बराबर है. लगभग 48 करोड़ युवक-युवतियां बेरोजगार हैं और अंतरराष्ट्रीय पैमाने पर नब्बे प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे हैं जिन्हें न तो मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध है और न ही पीने के लिए साफ पानी.

चन्दापुरी ने बिहार की स्थिति को सबसे ज्यादा दयनीय बताया तथा कहा कि विकास के साथ बाढ़, सुखाड़ एवं गरीबी पर नियंत्रण करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग केंद्र सरकार से बार – बार की है. नरेंद्र मोदी से इसे शीघ्र लागू करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि यह मुद्दा 2020 बिहार विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा होगा.

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