प्रदूषण से दिल्ली-एनसीआर में इमरजेंसी जैसे हालात, इन शहरों की भी हवा हुई जहरीली

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सर्दियों का मौसम करीब आते ही शहरों की हवा जहरीली होने लगती है. कारण ये है कि जाड़ों के मौसम में हवा में नमी का स्तर बढ़ने लगता है जिसके कारण हवा में तैरते धूल और धुएं के कण ऊपर नहीं जा पाते. इसी वजह से हवा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ने लगती है. वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गां पर होता है. वैसे तो दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या सबसे ज्यादा होती है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक गुड़गांव की हवा देशभर में सबसे ज्यादा खराब रही इसके बाद उत्तर प्रदेश का कानपुर नंबर दो पर रहा. यूपी में कानपुर के अलावा अन्य शहरों की हवा में भी प्रदूषण का स्तर बेहद खराब पाया गया है. बुधवार को गुड़गांव में एयर क्वालिटी इंडेक्स 416, कानपुर का 397, फरीदाबाद का 387, दिल्ली का 358 रहा.

गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, सड़कों से उड़ने वाली धूल, फैक्ट्री-कारखानों से निकलने वाला धुआं, पावर हाउस से उड़ने वाली राख, भवन निर्माण से उड़ने वाली धूल, खुले में जलाया जाने वाला कूड़ा, खेतों में जलाई जाने वाली पराली प्रदूषण की मुख्य वजहें मानी जाती हैं. दिल्ली में हवा दिन प्रतिदिन जहरीली होती जा रही है अगर हालात नहीं सुधरे तो स्कूलों को बंद करने का फैसला भी लिया जस सकता है.

सीपीसीबी ने दिल्ली वासियों से प्रदूषण फैलाने वाली औधौगिक इकाइयों को बंद रखने, निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने और गैरजरूरी यात्रा न करने की अपील की है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डा. हर्षवर्धन ने कहा कि प्रदूषण बहुत ही गंभीर समस्या है और इसे रोकने के लिए सभी को मिलकर जरूरी कदम उठाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट भी दिल्ली के प्रदूषण को कम करने को लेकर बराबर दिशानिर्देश जारी कर रहा है.

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