आखि़र सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा कि मीडिया संस्थानों पर हो कार्रवाई

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यदि किसी मीडिया संस्थान ने आपराधिक कृत्य किया है तो उसके खिलाफ अभियोग चलाया जाना चाहिए. यह बात सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान कही.  सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया संगठनों और प्रेस काउंसिल से पूछा कि यौन पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाले मीडिया संस्थानों और पत्रकारों पर मुकदमा क्यों नहीं चलाया जाता. जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि यौन पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक करना अपराध है और यदि कानून का उल्लंघन हाकता है तो कार्रवाई ज़रूर होनी चाहिए.

पीठ ने प्रेस काउंसिल की ओर से पेश वकील से पूछा कि आपने अबतक कितने लोगों को दंडित किया है. वकील ने कोर्ट से कहा कि इस मामले में प्रेस काउंसिल की शक्तियां सीमित हैं. वह उन संस्थानों पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकती.  कोर्ट ने प्रेस काउंसिल के वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि किसी अख़बार या मीडिया संस्थान ने आपराधिक कृत्य किया है तो आप पुलिस को बताएं कि कानून का उल्लंघन हुआ है और उस संस्थान के खिलाफ अभियोग चलाइये.

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